प्रभा खेतान फाउंडेशन की ओर से ‘एक मुलाकात’ श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित संवाद में मानव संग्रहालय के पूर्व निदेशक ने आदिवासी संस्कृति और गिरमिटिया इतिहास पर साझा किए गहन विचार
मानव सभ्यता को समझने के लिए भारत को समझना आवश्यक : अशोक कुमार तिवारी
मनुष्य की सबसे बड़ी पहचान उसकी जिजीविषा और परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता है। मानव सभ्यता का विकास केवल तकनीकी प्रगति की कहानी नहीं, बल्कि निरंतर प्रवास, संघर्ष, अनुकूलन और सांस्कृतिक संरक्षण का इतिहास भी है। भारत को समझना अपने आप में जीवनभर का कार्य है, क्योंकि इसकी सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक संरचना विश्व में अद्वितीय है। ये विचार मानव संग्रहालय, भोपाल के पूर्व निदेशक, प्रख्यात मानवविज्ञानी एवं लेखक अशोक कुमार तिवारी ने प्रभा खेतान फाउंडेशन की ‘अहसास वूमेन’ की ओर से ‘एक मुलाकात’ श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित संवाद में व्यक्त किए।
कार्यक्रम के प्रारंभ में रायपुर की ‘अहसास वूमेन’ की सदस्य अदिति श्रीवास्तव खंडेलवाल ने सभी का गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यक्रम में अतिथि से संवाद रायपुर की ‘अहसास वूमेन’ की कल्पना चौधरी ने किया। उन्होंने तिवारी जी के बाल्यकाल, मानव संग्रहालय की स्थापना, आदिवासी समाज के साथ उनके दशकों लंबे कार्य, मानव सभ्यता, प्रवास, गिरमिटिया इतिहास तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत जैसे अनेक विषयों पर विस्तृत चर्चा की।

इस अवसर पर डॉ. सुशील त्रिवेदी ने अशोक कुमार तिवारी का सम्मान किया। कार्यक्रम के अंत में अदिति श्रीवास्तव खंडेलवाल ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सभी अतिथियों, श्रोताओं एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।


