अयोध्या में कलम के मंच पर शिंजिनी कुमार ने साझा किए प्रेम, स्मृतियों और जीवन के गहन अनुभव
प्रेम कभी समाप्त नहीं होता, बल्कि समय के साथ उसका स्वरूप बदलता रहता है : शिंजिनी कुमार
प्रभा खेतान फाउंडेशन द्वारा आयोजित साहित्यिक श्रृंखला कलम के अंतर्गत अयोध्या में सुप्रसिद्ध लेखिका एवं कवयित्री शिंजिनी कुमार के साथ एक प्रेरक संवाद आयोजित किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में अहसास वूमेन फैज़ाबाद की सीमू घई ने अतिथियों का स्वागत किया।
अपने स्वागत वक्तव्य में उन्होंने प्रभा खेतान फाउंडेशन की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक पहलों का उल्लेख करते हुए बताया कि फाउंडेशन वर्षों से साहित्य, कला, संस्कृति और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सक्रिय है। कलम के माध्यम से लेखक और पाठकों के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जाता है। इसके साथ ही फाउंडेशन एक मुलाकात, लफ़्ज़, आखर, पोथी, सुर और साज़ तथा द राइट सर्कल जैसे विविध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी नियमित आयोजन करता है।

कार्यक्रम में अहसास वूमेन मेरठ की मंजरी मिश्रा ने शिंजिनी कुमार से संवाद किया। बातचीत के दौरान शिंजिनी कुमार ने कहा कि प्रेम कभी समाप्त नहीं होता, बल्कि समय के साथ उसका स्वरूप बदलता रहता है। उन्होंने अपनी चर्चित कविता ‘जहाँ प्रेम रहता है’ का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रेम के बाद भी उसकी स्मृतियाँ मन में जीवित रहती हैं और जीवन को निरंतर प्रभावित करती रहती हैं।
संवाद के दौरान उन्होंने अपनी रचनाओं में उपस्थित उदासी और संवेदनाओं के स्रोत पर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि अपनी माँ के अंतिम दिनों में उनके साथ बिताए समय ने जीवन के प्रति उनका दृष्टिकोण पूरी तरह बदल दिया। उनके अनुसार, मृत्यु के इतने निकट रहकर व्यक्ति जीवन, रिश्तों और प्रेम को नए अर्थों में समझता है। उन्होंने कहा कि उनकी कविताएँ केवल प्रेम का उत्सव नहीं हैं, बल्कि रिश्तों की जटिलताओं, संवाद, असहमति और मानवीय संवेदनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति भी हैं। इस अवसर पर शिंजिनी कुमार ने अपनी चर्चित कविता ‘दुष्यंत की प्रेमिका’ की रचना-प्रक्रिया भी साझा की।



