भारत की विशेषता है उसकी अध्यात्म-प्रधान संस्कृति : अखिलेन्द्र मिश्र
– प्रभा खेतान फाउंडेशन के ‘कलम’ में गूंजे साहित्य, अभिनय और अध्यात्म के स्वर
“भारत की विशेषता है उसकी अध्यात्म-प्रधान संस्कृति। हमारे ऋषियों ने गोष्ठियाँ करके भारतीय संस्कृति का निर्माण नहीं किया, बल्कि आत्मानुभूति के द्वारा उसे संवारा। अध्यात्म केवल ईश्वर को मानने की बात नहीं करता, बल्कि ईश्वर के साक्षात्कार की बात करता है।” ये विचार भारतीय रंगमंच, टेलीविजन और सिनेमा के वरिष्ठ अभिनेता, लेखक एवं चिंतक अखिलेन्द्र मिश्र ने प्रभा खेतान फाउंडेशन के प्रतिष्ठित साहित्यिक कार्यक्रम ‘कलम’ के अंतर्गत आयोजित कलम के विशेष संवादसत्र में व्यक्त किए।
कार्यक्रम का स्वागत वक्तव्य अहसास वूमेन, रांची की पूनम आनंद ने दिया साथ ही प्रभा खेतान फाउंडेशन के कार्यों की जानकारी दी। जबकि इस संवाद सत्र को साहित्यकार रेनू मिश्रा ने अपने प्रश्नों से प्रभावी बनाया। संवाद के दौरान अखिलेन्द्र मिश्र ने अपनी चर्चित पुस्तक ‘अभिनय, अभिनेता और अध्यात्म’ की रचना-यात्रा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि अभिनय पर हिन्दी में मौलिक साहित्य की कमी ने उन्हें इस पुस्तक को लिखने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि एक अभिनेता को केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक रूप से भी तैयार होना चाहिए। अभिनय में आत्म-अनुशासन, संवेदना और चरित्र की गहराई अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारतीय नाट्य परंपरा, नाट्यशास्त्र और अभिनय की आंतरिक प्रक्रिया पर भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर उन्होंने अपनी कविताओं ‘चेतावनी’ और ‘भारत’ का प्रभावशाली पाठ करते हुए दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
प्रश्नोत्तर सत्र में अखिलेन्द्र मिश्र ने अभिनय की तैयारी, चरित्र निर्माण, सिनेमा की सामाजिक जिम्मेदारी और युवा कलाकारों के लिए आवश्यक अनुशासन जैसे विषयों पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि कला का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज और व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाना भी है।
समापन अवसर पर पवन जी ने लेखक अखिलेन्द्र मिश्र का शॉल व स्मृति-चिह्न तथा एवं संवादकर्ता को भी स्मृति-चिह्न के रूप में कठपुतली प्रदान कर सम्मान किया। अहसास वूमेन, रांची की सीमा सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, सहयोगियों और साहित्य प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कलम रांची का आयोजन प्रभा खेतान फाउंडेशन की अहसास वूमेन, रांची, आतिथ्य सहयोगी रमाडा, रांची तथा हिन्दी प्रिंट मीडिया दैनिक जागरण के सहयोग से किया गया।
अध्यात्म केवल ईश्वर को मानने की बात नहीं करता, बल्कि ईश्वर के साक्षात्कार की बात करता है।
कला का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज और व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाना भी है।









