कविता केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, जीवन को समझने का एक तरीका है – आलोक श्रीवास्तव
लफ़्ज़ अलीगढ़ में आलोक श्रीवास्तव से रू-ब-रू साहित्य प्रेमी
प्रभा खेतान फाउंडेशन की साहित्यिक पहल लफ़्ज़ के अंतर्गत अलीगढ़ में आयोजित विशेष संवाद सत्र में सुप्रसिद्ध कवि, गीतकार और वरिष्ठ पत्रकार आलोक श्रीवास्तव ने अपनी उपस्थिति से साहित्यप्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का आयोजन अलीगढ़ के एमबीए हॉल में किया गया, जहाँ बड़ी संख्या में साहित्य, कविता और उर्दू-हिंदी भाषा के अनुरागी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का स्वागत अहसास वूमेन, अलीगढ़ की संस्थापक फैज़ा अब्बासी ने किया। उन्होंने अतिथि का परिचय देते हुए कहा कि आलोक श्रीवास्तव समकालीन हिंदी-उर्दू साहित्य की उन महत्वपूर्ण आवाज़ों में हैं जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से संवेदना, प्रेम, स्मृति और मानवीय रिश्तों को नई अभिव्यक्ति दी है।
संवाद के दौरान फैज़ा अब्बासी ने आलोक श्रीवास्तव से उनके साहित्यिक सफर, पत्रकारिता के अनुभवों, कविता की रचना-प्रक्रिया और उर्दू भाषा के प्रति उनके अनुराग पर विस्तार से चर्चा की। आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि कविता उनके लिए केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को समझने और महसूस करने का एक तरीका है। उन्होंने अपने चर्चित काव्य-संग्रह ‘आमीन’ तथा लेखन यात्रा से जुड़े कई संस्मरण श्रोताओं के साथ साझा किए।


